दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट बॉडी BCCI कैसे बचाती है करोड़ों का टैक्स? जानिए Section 12A का गणित। (BENEFIT OF A CHERITABLE TRUST)

क्या आप जानते है कि दुनियाँ की सबसे धनी क्रिकेट संस्था BCCI टैक्स नहीं देती है ? क्यों और कैसे ?, यह जानते है। 

जैसा कि आपको पता है कि BCCI ( Board of Control for Cricket in India) भारत में क्रिकेट की सबसे बड़ी संस्था है , भारत देश में होने वाले क्रिकेट से सम्बंधित हर कार्य इसके नजर में ही अंजाम होते है , और इस संस्था की एक और खासियत जो इसे सबसे महत्वपूर्ण बनती है वह है , यह दुनिया की सबसे धनी क्रिकेट बॉडी है , और दुनिया की सबसे बड़े तीन दिग्गज ( आस्ट्रेलिया , इंग्लैंड ,भारत ) में से एक है। 

और चुकि दुनियाँ में क्रिकेट फैंस की सबसे बड़ी संख्या भारत वर्ष में है इसलिए इसे  क्रिकेट की दुनिया में सबसे शक्तिशाली संस्था माना जाता है। 

BCCI के बारे में प्रमुख जानकारी -

  • स्थापना - भारत में इसकी स्थापना वर्ष 1928 को दिसंबर के महीने में हुआ था। 
  • मुख्यालय - इसका मुख्यालय वानखेड़े स्टेडियम , मुंबई में है। 
  • सदस्य - यह दुनिया में क्रिकेट को चलाने  वाली संस्था - ICC ( International Cricket Council ) का सदस्य है। 

BCCI के द्वारा किया जाने वाले कार्य 

यह संस्था पुरे भारत वर्ष में  क्रिकेट को विकसित करने , उसे मैनेज करने का कार्य करती है , यह कार्य काफी बड़ा है और काफी पेचीदा भी है। 
  • घरेलु प्रतियोगिता का आयोजन - बीसीसीआई पुरे भारत वर्ष में क्रिकेट के विकाश के लिए छोटे से लेकर बड़े क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन कराती है जिसमे प्रमुख है - रणजी ट्राफी , दिलीप ट्राफी , और विजय हजारे जैसे क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन करना। 
  • आई पी एल का आयोजन - दुनियाँ का सबसे पॉपुलर और सबसे ज्यादा धन खर्च करने वाला क्रिकेट प्रतियोगिता आई पी एल ( इंडियन प्रीमियर लीग ) का आयोजन भी बीसीसीआई ही करता है। 
  • भारत के टीम का सलेक्शन - क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत देश के प्रतिनिधित्व करने के लिए टीम चुनने का कार्य भी बीसीसीआई ही करती है। 
  • खेल के लिए स्टेडियम का रखरखाव - बीसीसीआई ही पुरे देश में क्रिकेट के प्रचार और प्रसार के लिए  क्रिकेट स्टेडियम का रखरखाव  और मरम्मत का कार्य करती है और उक्त स्टेडियम को क्रिकेट के अंतरास्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए तैयार करती है। 
BCCI UNDER 12A


इस तरह यह देश की एक काफी बड़ी संस्था है , और काफी बड़ी जिम्मेदारी का निर्वाह भी करती है , इसकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा आता है - 

BCCI के आय का साधन 

  • बीसीसीआई पुरे देश में क्रिकेट के प्रचार और प्रसार का कार्य बड़े पैमाने पर करती है , लेकिन इसके लिए इसे भारत सरकार से एक रुपये की भी मदद नहीं मिलती है , इसका सारा खर्च बीसीसीआई खुद वहन करता है।  इसकी आय का मुख्य जरिया मीडिया राइट है।  यह टीवी / ओटीटी पर मैच दिखाने के लिए मिडिया राइट देती है , वही इसके आय का मुख्य जरिया है।  इसके आलावा SPONSORSHIP भी कमाई का मुख्य जरिया है।  
  • इसके आय में सबसे बड़ा योगदान इसके द्वारा आयोजित लीग मैच - आई पी एल  है।  सिर्फ आई पी एल  से ही इसे वर्ष 2023 - 2024 में 1623 करोड़ की आय हुई थी। और वर्ष 2024 - 2025 में कुल आय रु 3358.00  करोड़ होने का अनुमान है। 
  • इस आय में आई पी एल से होने वाली आय लगभग 60 % से 70 % तक है , आई सी सी से रेवेन्यू शेयर लगभग - 10 % से 15 % तक की है , Bilateral Series Media Rights से लगभग 8 % से 10 % तक , Sponsorships & Miscellaneous के द्वारा 5 % से 8 % तक और WPL (Women's Premier League) के द्वारा 3 % से लेकर 5 % तक की आय हुई। 
इतनी आमदनी होने के बावजूद बीसीसीआई सीधे -सीधे आयकर नहीं देता है।  क्योकि बीसीसीआई अपने आप को एक Charitable Trust मानता है। 

Section 12A of the Income Tax Act, 1961

The Charitable Trust Under Income Tax
आयकर अधिनियम की धारा 12 A एक संस्था को " Charitable " होने का प्रमाण पत्र देता है। अगर कोई संस्था इसके अंतर्गत रजिस्टर्ड होती है तो उसकी " INCOME " पर " 0  " प्रतिशत आयकर लगता है।  इसमें शर्त यह है कि आपका पैसा सिर्फ उस मकसद पर खर्च हुआ हो जिसके लिए आप यहाँ रजिस्टर्ड हुए है।  
जैसे यहाँ पर बीसीसीआई अपने मकशद -  Promotion and development of cricket in India के लिए अपने आप को सेक्शन 12 A  में रजिस्ट्रेशन करवाया है , तो उसकी आय का 85 % पैसा सिर्फ क्रिकेट के प्रमोशन और विकाश के लिए ही खर्च होना चाहिए। 
अगर ऐसा है तो ऐसे संस्था के ऊपर धारा 12 ए  लागु होगा और उसकी कुल आय पर 0 % आयकर लगेगा। 
वह संस्था बाकि बचे 15 % को भविष्य के लिए संग्रह कर सकती है , हाँ , उक्त संस्था की वार्षिक आडिट किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट के द्वारा होना जरुरी है। 

Section 12A में किसका रजिस्ट्रेशन हो सकता है 

निम्नलिखित कल्याण कारी कार्यो के लिए रजिस्टर्ड संस्थाए सेक्शन 12 ए के लिए पात्र हो सकती है -
  1. गरीबो के भलाई का कार्य करने वाली संस्थाए। 
  2. योग का प्रचार और प्रसार करने वाली संस्थाए। 
  3. शिक्षा का प्रचार और प्रसार करने वाली संस्थाए। 
  4. आम जनता को धर्मार्थ सुविधा देने का कार्य करने वाली संस्थाए। 
  5. स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाए। 
  6. पर्यावरण की सुरक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाए। 
  7. प्राचीन स्मारकों की देखरेख और सुरक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाए। 
इस विषय में आगे बढ़ने से पहले मै यह स्पष्ट करना चाहता हु कि बीसीसीआई और आयकर विभाग में इस विषय से सम्बंधित विवाद है और अभी फरवरी 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में माना  है कि  बीसीसीआई एक चैरिटेबल ट्रस्ट है और अपना 85 % आमदनी अपने मकशद - क्रिकेट के प्रसार और प्रचार के लिए खर्च करती है इसलिए इसके लिए धारा -12 ए लागु होता है , और इसकी आय पर आयकर नहीं लगेगा। 
इसके बावजूद बीसीसीआई भविष्य में किसी विवाद से बचने के लिए हर वर्ष अग्रिम कर जमा करती है , इसके अलावा लगभग रु 3000 से ज्यादा का जी एस टी भी जमा करती है , और अपने खिलाडी , स्टाफ और वेंडर्स को किये गए भुगतान में से टी डी एस की कटौती कर के भी आय कर के खाते में जमा करती है। 

इस खबर से हमें यह भी सीखने को मिलता है कि कैसे हम आय कर की धारा 12 ए  का उपयोग कर के अपना आयकर बचा सकते है , आइये इस धारा को और भी करीब से देखे -

यह कानून आपको अपने कार्य से फायदा कमाने को नहीं रोकती है , यह कानून सिर्फ यह देखता है कि  आप अपनी प्राप्ति को अपने तथा कथित उद्देश्य पर खर्च कर रहे है या नहीं। 

और अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हमें निम्न कार्य करने पड़ेंगे -


👉 प्रथम - हमें एक ऐसे संस्था की स्थापना करनी होगी जिसका उद्देश्य व्यापार से लाभ कामना न हो। हाँ , आप अपने तथा कथित उद्देश्य से सम्बंधित साइड में ऐसे कार्य का आरम्भ कर सकते है , जिससे आपको आय की प्राप्ति होती रहे , लेकिन आप का मूल उद्देश्य बना रहे , जैसे BCCI ने IPL का आयोजन कर के भरपूर लाभ कमाया , लेकिन हाई कोर्ट ने यह माना कि यह उसके घोषित उद्देश्य क्रिकेट के प्रचार और प्रसार का उलंधन नहीं करता है , अपितु उक्त उद्देश्य को अपना कर ही वह लाभ का सृजन कर रहा है। 

अब इस कानून में एक शर्त यह भी है कि  आपकी कुल प्राप्ति में से आपके लाभ की मात्रा 20 % से ज्यादा ना हो।  यदि आपका लाभ 20 % से ज्यादा हुआ तो जिस वर्ष यह ज्यादा होगा उस वर्ष के लिए आपको धारा 12 ए का लाभ नहीं प्राप्त होगा। तो इस तरह हम देखते है की एक ट्रस्ट को कितना ध्यान लाभकारी व्यवसाय को देना है यह कानून स्वतः निर्धारण कर रहा है , इस तरह व्यापारी को भी अपना दायरा सिमित कर के चलना लाभकारी है।  हाँ , यह जरूर है एक बार यह स्पष्ट होने के बाद व्यापारी सब कुछ मैनेज कर लेता है। 

अपने बनाये हुए ट्रस्ट में से अपने परिवार के किसी सदस्य को लाभ के रूप में हम कुछ भी खर्च नहीं कर सकते है।  यह इस कानून में सख्त आदेश है। 

इस कानून से हम कैसे फायदा उठा सकते है इसका एक उदाहरण यहाँ दिया जा रहा है - 

एक विजय नाम के व्यक्ति है , जिसका दवाइयों का व्यवसाय है।  उनका एक चेरिटेबल ट्रस्ट भी है , जिसको चलाने  के बदले में वे रु 2,00, 000/- वेतन लेते है।  अब वे अपने मुख्य व्यवसाय से 10 करोड़ की दवाइयां , बाजार की कीमत पर अपने चेरिटेबल ट्रस्ट को दान कर देते है।   वे इसके लिए जीएसटी का इनवॉइस बनाते है।  और फिर अपने नेट प्रॉफिट पर टैक्स भी देते है।  हाँ , इस दान को वे डोनेशन के सेक्शन में डिडक्शन क्लेम भी करते है। 

दूसरी और चेरिटेबल ट्रस्ट फ्री मेडिकल कैंप लगाता  है। और उस फ्री मेडिकल कैंप के द्वारा अन्य स्वास्थ सुविधाओं के साथ वो 10 करोड़ की दवाये भी फ्री में मरीजों को दे देता है।  और इन सब कार्य को मैनेज करने के नाम पर वह मिस्टर विजय को रु 2 लाख की सैलरी हर माह देते है , और मिस्टर विजय अपने दान का क्लेम कर के आय कर में से छूट प्राप्त कर लेते है। 

हालाँकि इस कानून के द्वारा हमें कोई बहुत विशेष लाभ प्राप्त नहीं होता है , लेकिन इस कानून का लाभ लेकर हम अपने समाज और देश का बहुत भला कर सकते है। 

आशा है कि आपने आयकर की धारा 12 ए को अच्छी तरह समझ लिया है , लेकिन चेरिटेबल या दान से छूट प्राप्त करने के लिए आयकर में एक धारा  और दिया गया है , जिसे 80 G कहते है। 

अक्सर लोग इन दोनों को एक ही मान लेते है।  लेकिन यह दोनों दो अलग - अलग स्थिति को प्रदर्शित करता है , एक ध्येय है और दूसरा साधन है। 
धारा 12 ए एक चेरिटेबल ट्रस्ट के ऊपर लागु होता है। और धारा 80 जी उस संस्था को दान देने वाले व्यक्ति के लिए होता है। 



 

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