जी एस टी लागु होने के पहले छोटे व्यापारी अपना सारा खाता बही मैन्युअल ही रखना पसंद करते थे , चूकि अधिकांश छोटे व्यापारियों को कंप्यूटर पसन्द नहीं था और दूसरे यह एक खर्चीला साधन था , इसके अलावा गोपनीयता का अभाव भी एक कारण है जिसके कारण व्यापारी वर्ग कंप्यूटर एकाउंटिंग से बचता रहा है , इसके अतिरिक्त व्यापारी के आवश्यक्ता की समस्त जानकारी मैन्युअल एकाउंटिंग में मिल जाता था इसके कारण भी छोटे व्यापारी कंप्यूटर में अपना एकाउंटिंग नहीं रखता था। परन्तु जब से जी एस टी लागु हुआ है तब से कंप्यूटर एकाउंटिंग लगभग अनिवार्य हो गया है / आज बिना कंप्यूटर के जी एस टी रिटर्न भरना काफी मुश्किल है। कंप्यूटर एकाउंटिंग के फायदे -
1 ट्रांज़ैक्शन बेस रिटर्न :- हम अभी तक जितनी भी रिटर्न फाइल करते थे वे सब सारांश (summary ) बेस्ड थी परन्तु जी एस टी के अंतरगत अब हमें ट्रांज़ैक्शन बेस्ड रिटर्न फाइल करने पड़ेंगे। इस रिटर्न में हमें प्रत्येक लेन - देन , क्रय - विक्रय की जानकारी देनी पड़ती है। वह भी तीन अलग - अलग रिटर्न में। प्रत्येक व्यापारी और टैक्स भरने वाला अपनी टैक्स देनदारियां व टैक्स आधिक्य की जानकारी चाहता है , और यह उसे हर वक्त खबर रखनी पड़ती है साथ ही अपने साथ सम्बन्ध हर व्यापारी , लेनदार ,देनदार को प्रत्येक जानकारी देनी पड़ती है , यह सब बिना कंप्यूटर के संभव नहीं है।
2. आगत कर सेलर के रिटर्न पर निर्भर : वैट और एक्साइज के रिटर्न में व्यापारी के द्वारा दायर किया गया आगत कर ही मान्य होता था। लेकिन जी इस टी के अंतर्गत यह सेलर के द्वारा दायर किये गए रिटर्न पर निर्भर करता है , आगत कर का पता हमें जी एस टी आर -2 के द्वारा चलता है ,व्यापारी को उसे सिर्फ एप्प्रूव करना होता है और यदि कोई त्रुटि हो तो हमें सेलर को इन्फॉर्म करना होता है और उसके द्वारा ही त्रुटि सुधार किया जाता है। आगत कर के लिए जी इस टी में व्यापारी एक दूसरे के ऊपर निर्भर है , इससे हर व्यापारी को अपनी बुक्स का मिलान जी एस टी आर -2 में दाखिल सेलर के रिकार्ड से मिलान करना पड़ता है , अगर कोई त्रुटि रह गई और व्यापारी ने भी धयान नहीं दिया तो उसको इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है , यह मिलान मैन्युअल एकाउंटिंग में संभव नहीं है।
3. माह वार रिटर्न की अधिकता :-एक्साइज के रिटर्न में हम हर माह एक रिटर्न भरते थे , वैट में हम तिमाही रिटर्न भरते थे लेकिन जी एस टी के अंतर्गत हमे हर माह तीन रिटर्न और पुरे वर्ष में एक और अतिरिक्त रिटर्न दाखिल करना पड़ता है, कुल मिला कर हमें 37 रिटर्न भरना पड़ता है। और वह भी प्रत्येक माह के 10 वी , 15 वी और 20 वी तारीख को अनिवार्य रूप से दाखिल करना पड़ता है , कुछ डाटा स्वत: निर्धारित भी आती है जिसे हमें सेलेक्ट कर के अप्प्रोवे करना होता है। इस तरह रिटर्न की अधिकता के कारण मैन्युअल एकाउंटिंग दूरह कार्य है।
4. अंकेक्षर के कार्य के लिए :- रिटर्न कार्य के लिए हमें कई बार अपनी किताबो को सी ए और टैक्स कंसलटेंट के पास लेकर जाना पड़ता है यह कार्य भी कंप्यूटर एकाउंटिंग में आसानी से हो जाता है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें